भारतीय संस्कृति का खूबसूरत रंग है होली त्योहार" - गोपाल कृष्ण पटेल

  • 27-March-2021

होली खुशहाली और मस्ती का प्रतीक पर्व है। यह रंग और गुलाल का पर्व है। यह पर्व प्रकृति के साथ सामंजस्य और सहभागिता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है। यह जीवन के दुखों को भुलाकर अंतरतम् में नया उत्साह भरने का पर्व है। यह समाज में सौहार्द और आपसी सहयोग बढ़ाने का संदेश देने वाला पर्व भी है।

होली के रंग जन-मानस में खुशियां और उल्लास बिखेरते हैं। मस्ती और प्रेम का यह पर्व हमें आपस में जोड़ता है, रिश्तों में प्रेम के गहरे रंग भरता है। होली परंपरा, उल्लास और खुशियों के मणि-कांचन संयोग का उत्सव है। आइए, हम इस रंगोत्सव में डूबें, नाचे-गाएं और जीवन को जीवंत-ऊर्जावान बनाएं।

होली उमंगों, मस्ती, उत्साह और स्नेह से भरपूर त्योहार है। जीवन में ऊर्जा का संचार करने वाला रंगोत्सव राग और रंग का त्योहार है। राग का अर्थ है संगीत और रंग का अर्थ है जीवन में खुशियों का आरंभ।

इस ऋतु में जीवन और प्रकृति दोनों ही अपने आकर्षक रूप में होते हैं, संपूर्ण सृष्टि उल्लास से परिपूर्ण होती है। होली पर मात्र रंग और गुलाल ही नहीं उड़ते बल्कि खुशियों की फुहारें भी छूटती हैं। होली की टोलियां मस्ती में झूमती हुई वातावरण में हर्षोल्लास घोलती हैं। फागोत्सव नाचने-गाने और धूम मचाने का त्योहार है। 

रंगोत्सव हमारी भारतीय संस्कृति का सबसे खूबसूरत रंग है, जो हमारी जड़ों में जुड़ा है। इसका प्रमाण हमारी पौराणिक पुस्तकों और कथाओं में मिलता है। होली राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है। राधा-माधव की अमर प्रेम कहानी इस त्योहार को अद्वितीय बना देती है।

होली शिव-पार्वती के आलौकिक प्रेम को दर्शाती है। कामदेव को त्रिनेत्र से भस्म करने के पश्चात शिवजी ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया, माना जाता है कि होलिका दहन की आग्नि, वासना को जलाकर शुद्ध प्रेम का नवोन्मेष करती है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक पूतना वध की खुशी में भी होली मनाई जाती है।

भक्त प्रह्लाद की कथा विश्वास और आस्था का मार्ग प्रदर्शित करती है। प्रह्लाद का अर्थ होता है आनंद, जो संदेश देता है- आनंद के साथ धर्मपथ पर चलते रहने का। 

होली प्रकृति और प्रेम का पर्व है, यह त्योहार रिश्तों को ही करीब नहीं लाता बल्कि हमें प्रकृति के करीब भी ले जाता है। होली और प्रकृति एक-दूसरे के हमजोली हैं। इस पर्व के आयोजन हेतु अलग-अलग फूलों और केसर से रंग बनाए जाते हैं, होलिका की अग्नि में गेहूं की बालियां, चने के होले भूने जाते हैं, गाय के गोबर से खिलौने बनाकर होलिका को अर्पित किए जाते हैं। भांग और गुलाब की पंखुड़ियों को मिलाकर ठंडाई बनाई जाती है, चंदन का लेप लगाया जाता है।

ऋतुराज वसंत के रंग चारों ओर बिखरे होते हैं, रबी की फसल-गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों अपने पूर्ण यौवन पर होती है। रंगोत्सव प्रकृति के साथ मिलकर मानव जीवन में हर्षोल्लास भर देता है।

होली सच्चे अर्थों में भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, जिसके रंग अनेकता में एकता को दर्शाते हैं। होली जात-पात और ऊंच-नीच की भावना से विमुख, प्रेम, इंसानियत, भाईचारे और सद्भावना का त्योहार है। यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को जीवंत कर देने वाला पर्व है, जो विश्वपटल पर सभी को खुशियों, आत्मीयता, अभिन्नता और प्रेम का संदेश देता है।

होली का रंग और उत्साह देश की सीमाएं लांघकर विदेशों तक पहुंचा है। दूर-दूर से विदेशी मेहमान हमारे देश में होली मनाने आते हैं। सभी को एक रंग में रंग देने वाला फागोत्सव सौहार्द का प्रतीक है, जिसमें लोग एक-दूसरे को प्रेम-स्नेह की गुलाल लगाते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, लोकगीत गाए जाते हैं, लोग गले मिलकर एक दूसरे का मुंह मीठा कराते हैं। 

होली क्षमा और प्रेम का आनुषंगिक उत्सव है, जिसका मूल कंठ नहीं, हृदय है, जिसमें स्नेह की प्रधानता होती है। होली क्षमा और नई शुरुआत का सबसे अच्छा मुहूर्त होता है। रूठों की मनुहार करके उन्हें मनाने का सबसे अच्छा अवसर है रंगोत्सव। होली के स्नेह में भीगे रंगों से सारे क्लेश धुल जाते हैं। ये सारे गिले-शिकवे भुलाकर गले लगाने का पर्व है। कटुता, नाराजगी, शिकायतें छोड़कर एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाने और मन की कड़वाहट दूर करने का उत्सव है। 

मै प्रमाणित करता हूँ कि मेरी रचना मौलिक, स्वरचित है।

✍️✍️✍️✍️✍️ गोपाल कृष्ण पटेल
(दीनदयाल कॉलोनी ,जांजगीर छत्तीसगढ़)


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