"सतनाम धरम के उदीम करईया संत गुरुघासीदास बबा" - गोपाल कृष्ण पटेल

  • 14-December-2020

जब समाज म छुआ-छूत, उंच-नीच, झूठ-कपट के बोल बाला रिहिस त समाज ला एकता, भाई-चारा  अउ समरसता के सन्देस देवईया एक महान मनखे हर जनम लिस जेखर नाव संत गुरु घासीदास। संत गुरु घासीदास के जनम 18 दिसम्बर 1756 म छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिला म गिरौदपुरी नामक जघा म एक गरीब परवार म होय रिहिस। उंखर बाबू जी के नाव महंगू दास अउ दाई के नाव अमरौतिन बाई रिहिस।

नानपन म घसिया नाव ले परसिद्ध गुरु घासीदास जी के सत के प्रति अड़बड़ आस्था रिहिस। ओमन अपन जीवनकाल म अन्याय, अत्याचार, रुढ़िवाद अउ अंधविस्वास ल खतम करे के बीड़ा उठाइन अउ समाज के कल्यान बर हमेशा आघु रहय। संत गुरुघासीदास ला लईकापन ले ही वयराग्य मिले रिहिस अउ कहे जाथे कि  नानपन म ओमन कईठन चमत्कार घलो दिखाए रिहिन जेखर मनखेमन के उपर प्रभाव पडिस।

गुरु घासीदास जी मन समाज के मनखे मन ला सादा जीनगी जीये के प्रेरणा दिन। ओमन न सिरिफ सत की आराधना किन, बल्कि समाज म नवा जागरीति पईदा करिन अउ अपन तपस्या ले मिले गियान अउ सक्ति के उपयोग ले मनखेमन के सेवा के कारज म काम करिन। एखर संगे संग मनखे मन परेम अउ मानउता के संदेस दिन।

एहि परभाव के चलत बनेच मनखेमन बबा के अनुआयी होइन। फेर अइसनेच छत्तीसगढ़ म 'सतनाम पंथ' के ईस्थापना घलव होइस। ये संप्रदाय के मनखेमन ओमनला अवतारी पुरुष के रूप म मानथे। गुरु घासीदास के सबले सुग्घर रचना म उंखर सात बचन सतनाम पंथ के 'सप्त सिद्धांत' के रूप म परतिष्ठित हे। एखरे कारन सतनाम पंथ के उदीम करइया घलो गुरु घासीदास बबा ला ही मानथे। जम्मो छत्तीसगढ़ राज म गुरु घासीदास के जयंती 18 दिसंबर ले एक माह तक बड़का पयमाना म उत्सव के रूप म सरद्धा अउ उछाह के संग मनाय जाथे।

गुरू घासीदास बबा चिरई चुरगुन,गाय बछरू मन ले घलव मया करे के सीख देथे। गुरू घासीदास के संदेस ह समाज के पिछड़इया समुदाय म पोठ असर पडिस। छत्तीसगढ़ के परथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर नारायण सिंह ल घलव गुरू घासीदास के सिध्दांत के पोठ प्रभाव रिहिस। गुरू घासीदास के संदेस अउ उंखर जीवनी के परचार परसार पंथी गीत अउ नृत्य के घलव होईस। यह छत्तीसगढ़ की सबले सुग्घर अउ बड़का लोक विधा घलो माने जाथे।

बबा गुरु घासीदास की जयंती ले हमनला पूजा करे के प्रेरना मिलथे अउ पूजा ले सुग्घर बिचार म बढोतरी होथे। एखर ले समाज म सुग्घर कारज अउ मनखे मन के सेवा करे के प्रेरना मिलथे। बबा के बताए रद्दा म चलइया मनखेमन अपन जीनगी म अपन अउ अपन परवार के उन्नति कर सकत हे।

  ✍️✍️✍️✍️✍️   गोपाल कृष्ण पटेल ,  ( दीनदयाल कॉलोनी ,जांजगीर ,छत्तीसगढ़ )


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