राजेन्द्र जैन, एक ऐसे व्यक्ति है, जो न तो बड़े नेता है और न ही कोई बड़े अधिकारी। फिर भी उनके द्वारा हर साल समाजसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करते हैं - द नेक्स्ट न्यूज़

  • 20-December-2019


राजेन्द्र जैन “संपादक” छ.ग.का पहरेदार, अम्बिकापुर

छत्तीसगढ़ का पहरेदार साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक राजेन्द्र जैन ने देशभक्ति की भावना को जाग्रृत करने का सही तरीका अपनाया है !

 छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान जैसे भव्य समारोह का आयोजन करने वालों के स्वाभिमान को सलाम !

सम्पादकीय : -

आज समाजसेवा का मतलब, नेतागिरी करना हो गया है। आम इंसान सोचता है कि वो तो समाजसेवा कर ही नहीं सकता। समाजसेवा करने के लिए समय और पैसा चाहिए और दोनों चीज उनके पास नहीं होती। क्योंकि आम जनता का पूरा समय पैसा कमाने में ही खर्च हो जाता है! ऐसे में ‘समाजसेवा’ शब्द एक फैशन की तरह इस्तेमाल होने लगा है। जो थोड़ी-बहुत समाजसेवा होती है, वो भी सिर्फ सोशल मीड़िया पर छा जाने के लिए। पहले कहा जाता था “नेकी कर कूएं में ड़ाल” लेकिन अब कूएं ही नहीं रहें। अत: अब ऐसा लगता है कि हर छोटी-मोटी नेकी सोशल मीड़िया पर अपलोड करने के लिए ही की जाती है। लेकिन आज हम मिलेंगे एक ऐसे व्यक्ति से, जो न तो कोई नेता है, न हीं कोई बड़ा अधिकारी! फिर भी उसने प्रदेश के किसी भी कोने में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान से सम्मानित कर उदाहरण पेश किया है। इन सज्जन का नाम है ‘’राजेन्द्र जैन, जो अम्बिकापुर , जिला सरगुजा छत्तीसगढ़ के रहनेवाले है और छत्तीसगढ़ का पहरेदार साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक हैं । 

छत्तीसगढ़ का पहरेदार साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक की मीडिया से अपेक्षाएं और उनके संकल्प

मीडिया की महती भूमिका से आज सम्पूर्ण विश्व सुपरिचित है। दिनानुदिन नई-नई तकनीकों और सुविधाओं से लैस होता हुआ मीडिया-जगत संसार के कोने-कोने तक अपनी पैठ बना रहा है। बड़ी तेजी से इसका विकास हुआ है। और-और विकसित होता हुआ यह अपने विस्तार में मानवीय बहुविध क्रिया-व्यापारों को बहुत ही कुशलता के साथ समेट-सहेज रहा है। इसका योगदान जिस व्यापक परिप्रेक्ष्य में है, उसकी स्वीकृति को कोई नकार नहीं सकता है। पठ्य और दृश्य माध्यमों से पहले भी किसी-न-किसी रूप में मीडिया की अहमियत थी। चाहे उसका रूप जैसा और जो भी रहा हो। मानने वाले देवर्षि नारद को प्रथम मीडियाकर्मी के रूप में मानते हैं।

 

 

 


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